4 फ़र॰ 2015

स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। जब हम खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जिस भी सतह पर मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं।
स्वाइन फ्लू ने उन लोगो को सबसे अघिक खतरा है जिन्हे निम्न में से कोई बीमारी है जैसे-
  • किडनी या हृदय की बीमारी
  • सांस की बीमारी (दमा)
  • न्यूरोलॉजिकल बीमारी मसलन, पर्किंसन
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • इसके अलावा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओ और पाँच साल से कम आयु के बच्चों को भी काफी खतरा है।

कैसे करें स्वाइन फ़्लू से बचाव-
  • रोज सुबह उठकर 5 तुलसी की पत्तियाँ धोकर खाएँ।
  • गिलोय (अमृता)  की एक फुट लंबी डाल का हिस्सा, तुलसी की 5-6 पत्तियों के साथ 15 मिनट तक उबालें। स्वाद अनुसार सेंधा नमक या मिश्री मिलाकर, कुनकुना होने पर इस काढ़े को पिएँ।
  • लहसुन की दो कलियाँ रोज सुबह खाली पेट कुनकुने पानी के साथ लेने से रोग प्रतिरोधक शक्ति में इजाफा होगा।
  • तुलसी के पत्ते और काली मिर्च के दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पीने से लाभ होगा।
  • रात को सोते समय दूध में ½ चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीने से फायदा होगा। 
  • आंवला पाउडर (आधा चम्मच) को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
  • रोज ग्वारपाठे का 1 चम्मच गूदा पानी के साथ लें। इससे जोड़ों के दर्द कम होने से साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। 
इसके अलावा, शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत करने के लिये रोज प्राणायाम करें। घर का ताजा बना खाना खाएं। बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें खाएं। पानी ज्यादा पिएं। ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं। रसदार फलों का सेवन करें। मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, सेब, तरबूज और अनार ज़रूर ले। दिन में कई बार अपने हाथ एंटिबायोटिक साबुन से धोएँ। अल्कोहोलिक क्लींजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

15 जन॰ 2015

पौष्टिक गुणों का भंडार है मूली

मूली खाओ रोग भगाओ
आयुर्वेद के अनुसार हमारे दैनिक प्रयोग में आनेवाले फल सब्जियों में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं I ऐसी ही एक सब्जी है मूली (Raphnus sativus)जिसका प्रयोग हम अक्सर अपने भोजन में करते हैंI मूली धरती के नीचे उगने वाली पौधे की जड होती हैं। धरती के ऊपर रहने वाले इसके पत्ते भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसके पौधे में आने वाली फलियाँ भी समान रूप से उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक है।

मूली में कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, आयोडीन, आयरन तथा फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके अलावा मूली में सोडियम, क्लोरीन, फॉस्फोरस तथा मैग्नीशियम भी पाया जाता है। मूली में विटामिन '', 'बी' और 'सी' भी प्राप्त होते हैं।

भोजन के साथ प्रतिदिन एक मूली खाने से रक्तविकार दूर होते हैं, नेत्रज्योति बढ़ती है, तथा शरीर के जोड़ों की जकड़न भी दूर होती है। मूली के प्रतिदिन सेवन से रंग निखरता है, खुश्की दूर होती है और चेहरे की लालिमा बढ़ती है। इसे खाने से खाना जल्दी पच जाता है। यदि आप मूली के स्वास्थ्य लाभ तथा इससे होने वाले घरेलू उपचारों के बारे में जानना चाहते हैं, तो ज़रूर पढ़े यह लेख-
  • मोटापा नियंत्रित करने के लिए मूली बहुत लाभदायक है। मूली के रस में नींबू नमक मिलाकर नियमित पीने से शरीर का मोटापा घटता है और शरीर सुडौल होता है।
  • मूली के टुकड़े पर नींबू का रस लगाकर दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांत साफ होंगे पीलापन दूर होगा। मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करने से पीने से पायरिया से परेशान लोगो को लाभ मिलता है। मूली को चबा-चबा कर खाना दांतों मसूड़ों को निरोग निरोगी रखता है।
  • मूली के रस में सामान मात्रा में अनार का रस मिला कर पीने से रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ता है और रक्ताल्पता का रोग दूर होता है।
  • मूली पर नींबू नमक लगा कर भोजन में सलाद के रूप में लेने से कब्ज से राहत मिलती है
  • गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारें आती हो या आप एसिडिटी से परेशान हो, तो ऐसे में मूली के पत्तों का रस मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ होता है।
  • मूली के पत्ते चबाने से हिचकी बन्द हो जाती है।
  • बवासीर में मूली को हल्दी के साथ खाने से रोग से राहत मिलती है मूली का रस पीने से मूत्र रोगों में भी लाभ होता है।
  • मूली के पत्तों पर सेंधा नमक मिला कर रोज सवेरे खाने से मुंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है
  • मूली के रस में तिल्ली का तेल मिलाकर और उसे हल्का गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द तथा कान की खुजली ठीक होते हैं।
  • मूली का सेवन करने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं तथा पेट के घाव भी ठीक होते हैं।
  • पीलिया रोग मेंएक ताजा कच्ची मूली रोज़ सुबह उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में रोग ठीक हो जाता है।
  • मूली के बीजों को उसके पत्तों के रस के साथ पीसकर लेप करने से अनेक चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • मूली मुंहासो के उपचार में भी कारगर है। मूली का एक टुकड़ा काट कर मुंहासों पर लगाएं। १०- १५ मिनट बाद चेहरे को ठण्डे पानी से धो लें, काफी लाभ होगा।
  • मूली का रस पानी में मिलाकर सिर धोने से जुएँ नष्ट होती हैं।

31 दिस॰ 2014

करेले (Bitter Gourd) के स्वास्थ्य लाभ


करेले के गुणों से सब परिचित हैं। करेला बवासीर से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी है। कड़वी लौकी का रस पीने या एक महीने के लिए हर सुबह छाछ के साथ इसे लेने से इस दर्दनाक बीमारी से छुटकारा प्राप्त करने में फायदेमंद होगा। करेला फाइबर में उच्च है और इसलिए कब्ज से बचाता है। यह आमाशय रस का स्राव उत्तेजक द्वारा पेट संबंधी विकारों का इलाज कर सकते हैं। यह अपच से पीड़ित के लिए अत्यधिक लाभकारी है। करेला फोड़े और खुजली का इलाज करने के लिए भी फायदेमंद है।

करेला उच्च रक्त शर्करा के स्तर को कम कर देता है इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है। यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है। इसका रस रक्त में शर्करा की मात्रा पर नियंत्रण रखने के लिए खाली पेट पर सुबह लिया जा सकता है। करेला संक्रमण और रोगों के खिलाफ हमारे शरीर की लड़ व्यवस्था में सुधार लाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए भी फायदेमंद है। 
करेला पत्र का पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है। करेले के रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है। करेला आंख की समस्याओं के इलाज और दृष्टि में सुधार में मदद करता है। इसमें बीटा कैरोटीन उच्च मात्रा में पाया जाता है।  


करेले के ताजे फलों अथवा पत्तों को कूटकर रस निकालकर गुनगुना करके - बूँद कान में डालने से कान दर्द लाभ होता है। सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है।